मुलताई नगर पालिका द्वारा कचरा प्रबंधन के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद शहर में गंदगी की स्थिति बनी हुई है? भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे "स्वच्छ भारत अभियान" पूरी तरह से फेल हो गया है। पुराना जनपद ऑफिस,जो की जर्जर अवस्था में है, वहां पर भी कचरो का अंबार लगा हुआ है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला के सामने कचरा घर के साथ-साथ, अन्य वार्डों में भी सरेआम गंदगी पड़ी देखी जा सकती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मासोद रोड स्थित ढाई हेक्टेयर के ट्रैकिंग ग्राउंड में, कचरा का अंबार इतना बढ़ गया है कि, अब नए कचरे के लिए जगह ही बाकी नहीं रही। आलम यह है कि 6 महीने पहले कचरा हटाने के नाम पर उन 89 लाख रुपए का भुगतान करने के बाद भी, जमीन खाली नहीं हो सकी। स्थल पर कचरे का भारी अंबार दिखाई दे रहा है।
*89 लाख का भुगतान,नतीजा शून्य*
नगर पालिका मुलताई ने करीब 1 साल पहले, लीजेंसी वेस्ट डंप साइड रिमेडियेशन योजना के तहत, पुराने कचरे के ढेर को खत्म करने का ठेका,नागपुर की हाइड्रो इंडिया कंपनी को दिया था। लगभग 16 हजार मेट्रिक टन कचरा साफ करने के नाम पर, कंपनी को 89 लाख रुपए का भारी रकम भुगतान भी कर दिया गया। इसके बावजूद भी ट्रैकिंग ग्राउंड में कचरा का पहाड़ कम होने के बजाय और ऊंचा हो गया है। यहां तक की 2 साल पहले बनाया गया बगीचा, भी कचरे के नीचे दबकर पूरी तरह उजड़ चुका है।
*एनजीटी की रिपोर्ट में खुलासा*
इस गंभीर लापरवाही पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन. जी.टी.) की भोपाल पीठ ने भी कड़ा रुख अपनाया है? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर पालिका की संयुक्त जांच रिपोर्ट में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां कचरे की वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग नहीं हो रही है। और ना ही पर्यावरण सुरक्षा के कोई इंतजाम है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध संक्रामक बीमारियों और आए दिन कचरे में लगने वाली आग के धुएं का सामना करना पड़ रहा है।
*प्रशासन को नए टेंडर का इंतजार*
इस पूरे मामले में नगर पालिका सीएमओ वीरेंद्र तिवारी का कहना है कि, कचरा प्रबंधन के लिए अब, नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक, कचरा प्रोसेसिंग का काम अटका रहेगा।


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