विगत एक माह पहले ग्राम परमंडल के समिति प्रबंधक देवीराम नरवरे को मुलताई कृषि उपज मंडी में चना खरीदी के समय भारी अनियमितताएं और चना तुलवाई में भारी गड़बड़ी और पैसे मांगने की शिकायत की गई थी। शिकायत होने पर,(1) बैतूल कलेक्टर डॉ.सौरभ संजय सोनवाने ,(2) राजीव कहार एस डी एम मुलताई (3) संजय बारिया तहसीलदार मुलताई (4) के. के. शिव उपायुक्त बैतूल,(5) सुरेंद्र पराते सहा. संचालक कृषि,(6) प्रदीप ग्रेवाल जिला विपणन अधिकारी बैतूल की संयुक्त गठित टीम ने जांच की। जांच में अनियमितताओं और गड़बड़ी की पुष्टि कर मौके पर पंचनामा बनाकर देवीदास नरवरे को निलंबित किया गया। उसकी जगह हरिराम बोरबन को नियुक्त किया गया। परंतु यह कैसा निलंबन था कि,देवीदास नरवरे को यथावत रखा और उसने पूरे माह मंडी में खरीदी का काम किया। और रिश्वत भी कमाई। और हरिराम बोरबन ने एक भी दिन आकर काम नहीं किया। यह शायद पहली बार हुआ है कि कलेक्टर के निर्देशन में पूरे जिले की सरकार के आला अधिकारियों ने संयुक्त टीम बनाकर जांच की, और दोषी रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी? यह तो जांच का खुल्लम खुल्ला मजाक उड़ाने जैसा प्रतीत होता है। जबकि जांच में दोषी पाए जाने के बाद, समिति प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उसे मौके से हटाए जाना था।
//अकूत संपत्ति का मालिक है समिति प्रबंधक//
ग्राम परमंडल का यह समिति प्रबंधक, फसल बीमा, बीज़, खाद, के वितरण में गबन कर, समिति से भ्रष्टाचार करते हुए संपत्ति का मालिक बन गया है। मामूली सी तनख्वाह पर खेत,वर्तमान में 15 एकड़ जमीन खरीदना ,बड़ा प्लाट , आलीशान बहुमंजिला मकान,कैसे संभव है। इसकी सोसाइटी में आने वाले आसपास के सारे किसान इससे बहुत परेशान है, परंतु इसकी दबंगई के कारण कोई सामने नहीं आता।
हमारे पास है रिश्वतखोरी के पुख्ता सबूत, और वीडियो? हम करेंगे इसका पर्दाफाश,,,,, खबर अभी आगे भी है,,,,पढ़िए अगले अंक में,,,,,?



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