विगत दिनों परमंडल के समिति प्रबंधक देवीदास नरवरे को नापतोल में भारी गड़बड़ी करने, तथा किसानों से रिश्वत मांगने की शिकायत होने पर जांच टीम गठित की गई थी।
जिले के आला अधिकारियों की गठित इस टीम में स्वयं जिला कलेक्टर महोदय डॉक्टर सौरभ संजय सोनवने सहित,सहकारिता विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी, एसडीएम मुलताई, तहसीलदार मुलताई, सहित अन्य लोग शामिल थे। इस जांच में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी होने की पुष्टि की गई ,और स्थल पर ही पंचनामा बनाकर समिति प्रबंधक देवीदास नरवरे को तुरंत निलंबित किया गया। और उसकी जगह अन्य दूसरे व्यक्ति को प्रभार सोपा गया। परंतु देखा गया कि, देवीदास नरवरे ने ही पूरे महीने निलंबित होने के बाद गल्ला मंडी में काम किया, और नवनियुक्त व्यक्ति हरिराम एक भी दिन काम पर नहीं आया। सूत्र बता रहे हैं कि देवीदास नरवरे को दो-तीन दिन के बाद ही, उसके बैतूल के विभागीय अधिकारियों ने फौरन बहस भी कर दिया। अब यह निलंबन था, या मजाक स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है। यह तो माननीय कलेक्टर महोदय की जांच और करवाई को हवा में उड़ा दिया गया। सूत्र बता रहे हैं कि सहकारिता के जिला स्तरीय अधिकारी ने, माननीय कलेक्टर महोदय की जांच को,अंधेरे में रखकर ,दबाकर उसे बहाल कर दिया। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि, इसकी बहाली में लेनदेन भी किया गया है। जिस जांच में स्वयं जिला कलेक्टर करवाई कर रहे हैं उसे जांच को हल्के में लेकर दबा देना, इसका आशय यह है कि, कलेक्टर पद का कोई महत्व ही नहीं है? ऐसा लगता है कि, सहकारिता के अधिकारियों ने कलेक्टर महोदय की जांच को अंधेरे में रखा है, और लेनदेन कर उसे बहाल कर दिया गया है? वरना कलेक्टर की जांच का इस तरह से हवा में उड़कर दब जाना संभव नहीं हो सकता? इस बारे में मीडिया संगठन का एक दल स्वयं कलेक्टर से मिलेगा?,,,,, और उन्हें सारे सबूत दिखाकर, पूरी फाइल दिखाकर,,, इस बारे में चर्चा करेगा,,,? इस तरह से हम करेंगे इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश,,,,,। खबर अभी बाकी है आगे पड़े?



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