गत 20 जुलाई को पुण्य सलीला मां ताप्ती का जन्मोत्सव को लेकर आम जनता बड़ी हर्ष और उल्लास में थी।परंतु यह उत्सव भरी अव्यवस्था के साथ आम जनता की परेशानी का कारण बनेगा,पता नहीं था। आयोजन में भारी अव्यवस्था देखी गई।
अल सुबह से ही ताप्ती मंदिर सहित ,सरोवर तथा परिक्रमा मार्ग भीड़ से खचाखच भरा था,की पूजा अर्चना के लिए मां ताप्ती मंदिर पहुंचना मुश्किल था।पुलिस के संरक्षण में कुछ खास लोग और नेता ही पूजा कर सके।आम लोगों को परेशानी हो रही थी।
//*धरती कांप उठे ऐसी डी जे ध्वनि के साथ निकली रैली//*
दोपहर बाद जब हनुमान प्रतिमा युक्त रैली में फूल साउंड में बजते 8--10 डी जे की ध्वनि ने तो जसे कहर ढा दिया।जो कि इंसानी सुनने की क्षमता से कई गुना अधिक साउंड में बजते डी जे,आम लोगों को भारी परेशानी का सबब बने हुए थे।बिना किसी की जान की परवाह किए हुए, डी जे की थाप पर गटर मस्ती करते 20--22 साल के युवक जो कही बाहर से मंगवाए गए थे,जिस जगह से गुजरते वहां कोहराम मचा रहा था ।कई लोग तो कान दबा कर बच रहे थे। भीड़ में किसी को किसी की चिंता नहीं ऐसा माहौल बन गया था।
ऐसे आस्था कहे या श्रद्धा समझ से परे है?
मां ताप्ती सभी की आराध्य है, परंतु इस तरह का माहौल शायद पहली बार देखने को मिला।
*बस स्टैंड बंद रहने से यात्रियों को हुई परेशानी*
इस अवसर पर बस स्टैंड पर प्रवेश वर्जित किया गया था। जिससे यात्रियों को अपने सफ़र के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बसों को नगर से एक किलोमीटर दूरी पर ही रोक दिया गया था ,जिससे अपना सफर तय करने के लिए यात्रियों को नगर से बाहर जाकर बस पकड़नी पड़ी। ऐसा करना मजबूरी बन गया था। इस दौरान मुसाफिर बस के बारे में जानकारी पूछते हुए दिखाई दिए। कई यात्री इधर से उधर भटकते दिखाई दिए।
*स्थानीय प्रशासन के अलावा जिला प्रशासन भी रहा लापरवाह*
मां ताप्ती के जन्मोत्सव पर नगर पालिका प्रशासन तथा जिला प्रशासन की भी लापरवाही उजागर होती है। कलेक्टर द्वारा जन्मोत्सव के पूर्व समीक्षा लेने पर आवारा पशु ताप्ती परिसर में घुस आए थे। जिसे रोकने की कवायत की गई थी ,परंतु स्थानीय प्रशासन घूमते आवारा पशुओं को रोकने में पूरी तरह से असफल रहा। घटना स्वरूप महा आरती में एक काले रंग के सांड ने भगदड़ मचा कर कई लोगों को घायल कर दिया । अगर प्रशासन जागरूक होता तो यह घटना नहीं होती थी। नगर पालिका द्वारा चलाए गए पशुओं को बंद करने का अभियान चलाया था, परंतु एक दिन चलकर यह अभियान थम गया। फल स्वरुप सड़कों पर आवारा पशु घूमते पाए गए ,और सांड ने यह घटना कर दी।
नगर के बस स्टैंड को बंद करने का कोई औचित्य नहीं था ।अगर शासन प्रशासन ध्यान देता तो, भोपाल बैतूल के तरफ से आने वाली छिंदवाड़ा, अमरावती,नागपुर जाने वाली बसों को आसानी से निकाला जा सकता था। परंतु प्रशासन में इस तरफ ध्यान नहीं दिया।और बस स्टैंड ही बंद कर दिया।जिसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ा।


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