इन दिनों नगर की कृषि उपज मंडी में भर्राशाही का आलम है? आधिकारियों की इतनी मनमानी है कि,चाहो तो ऑफिस आ जाओ,नहीं तो कोई जरूरी नहीं है? सारा काम राम भरोसे चल रहा है।अव्यवस्था इतनी है कि,यहां के व्यापारी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं? परिसर में तो पीने का पानी तक नहीं है।
व्यापारी प्यासे रहे,या पानी घर से लाओ,या खरीद कर पियो।
// परिसर हर जगह ताला बंदी//
मंडी परिसर में प्रवेष करते ही अव्यवस्था स्पष्ट नजर आती हैं? पेयजल व्यवस्था पर ताला बंद,जांच चौकी ताला बंद,सार्वजनिक सुलभ शौचालय ताला बंद,मिट्टी परीक्षण कक्ष ताला बंद,विश्राम भवन ताला बंद,इस तरह का आलम है?व्यापारियों ने बताया कि,मंडी में आए वाहनों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था तक नहीं है।व्यापारियों से टैक्स लेकर रशीद भी नहीं दी जा रही है।व्यापारियों ने यह भी बताया कि,पूरा मंडी परिसर पानी नहीं रहने से सुखा है,उन्हें पीने का पानी घर से या खरीद कर पीना पड़ रहा है।साफ सफाई झाड़ू स्वयं को लगानी पड़ती है।सार्वजनिक शौचालय में ताला बंद होने से भरी परेशानी हो रही है।कोई शिकायत भी किससे करे,अधिकारी उपस्थित नहीं रहते।इस तरह नगर की कृषि उपज मंडी में भर्राशाही का आलम है? अधिकारियों की निष्क्रियता से बैतूल जिले की दूसरे नंबर की मंडी, ठप्प हो कर रह गई है।और यही आलम रहा तो यहां की मंडी खत्म भी हो सकती हैं?


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